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हनुमानजी की भजन

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*हनुमानजी की भजन* *हनुमानजी की बंदना* लोग कहते तेरी पूजा होवे२ केवल मंगलवार।                     हमारे लिये हर दिन मंगलवार। लोग कहते तोही शेदुर चढ़ता२ केवल मंगलवार।                       हमारे लिये हर दिन मंगलवार।१। तू ही मेरा करता धरता। तेरी पूजा आरति करता। बस यही मेरा कारोबार।                      हमारे लिये हर दिन मंगलवार।२। पवन पुत्र अंजनि के नंदन। तेरा प्रभु करता हूँ वंदन। तु ही मेरी सरकार ।                 हमारे लिये हर दिन मंगलवार।३। *हनुमानजी की महिमा* रामचंन्द्र जब जनम लियो है। मिलने की इच्छा प्रगट कियो है। आप पहुँचे दशरथ द्वार।             हमारे लिये हर दिन मंगलवार।४। असुर कहे तम्हें छोटा बंदर। मारा उनको घुस के अंदर। धरे देह विकराल।             हमारे लिये हर दिन मंगलवार।५। महाबली हो महा हो ज्...

शायरी २

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                  *अगर खुद्दार हो* लेकर पुष्प बैठ जाओ तितलियां उमडा़एगी। बैठ जाओ जाल विछाकर चिड़ियिया फस जाएगी। इजहार कभी मत करना गर थोड़ा खुद्दार हो कृष्ण सा कुछ कर दिखाओ गोपिया घिर जाएगी।।

*बेटी बचाओ मे एक आशिक का विचार*

*बेटी बचाओ मे एक आशिक का विचार* कोख मे लड़कियो को मार क्या तु करेगा। आशिको को अलविदा दुनिया क्या तु करेगा। लड़किया गर न रही तो, आदमी क्या आदमी से Love you कहेगा।

संक्षिप्त कृष्णा (कविता )

जय श्रीकृष्ण  कुछ दिनो पहले कोई आया था। जम के धूम मचाया था। माखन भी खूब चुराया था। सब को नाच नचाया था।                  कुछ दिनो पहले........ बाबा का था लल्ला प्यारा। मइआ के आंखों का तारा। बलदाऊ का छोटा भइआ गइआ भी खूब चराया था।                   कुछ दिनो पहले ......... गोपिकाओं संग रास रचाया। फिर भी लाखो का मन भाया। सब जाने वह परमब्रह्म है सृष्टी वही बनाया था।                  कुछ दिनो पहले....... पता नहीं कितने असुरों को मारा। संग अपने मामा को संहारा। फिर छोड़ दिया मथुरा नगरी को द्वारिका वहीं बनाया था।                       कुछ दिनो पहले ......... हजारों विवाह कर डाला उसने। एक मित्र भी बना डाला उसने। 125 वर्षों के बाद पुनः ब्रम्ह मे सयाया था। कुछ दिनो पहले कोई आया था। जम के धूम मचाया था।

श्रीकृष्ण जन्म(घनाक्षरी)

जय श्रीकृष्ण महि माही खेल काही जन्म लिओ श्रीकृष्ण बुधवार अष्टमी को जेल मे ही आयो है।                लइ वशुदेव ओको चलि दियो गोकुला को                 बीच माही यमुना भी  उधम मचायो है। कृष्ण ने भी जोर लात मारी यमुना को वशुदेवजी के चरनो मे यमुना लोटायो है।                   नंदद्वार पहुच गयो अब वशुदेव जी                    सीधे नंदजी के महल के अंदर सकायो है। यशुमति लगे धरि अपने लल्ला को लाली यशुमति की गोद मे उठायो है।                      लाला धरि लाली को लिए वशुदेवजी                     मथुरा की ओर तुरत भगायो है। बन गए कृष्णचन्द्र नंद के नंदन महराजकंश झूर घंटा बजायो है।